श्री हनुमान चालीसा with meaning in Hindi and English

॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ shrī guru charaṇ saroj raj, nij manu mukuru sudhāribaraṇau raghubar bimal jasu, jo dāyaku phal chāri बुद्धिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार।बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश बिकार॥ buddhihīn tanu jānike, sumiraũ pavan kumārbal buddhi vidyā
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श्री राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र Lyrics in Hindi with meaning

मुनीन्द्र–वृन्द–वन्दिते त्रिलोक–शोक–हारिणि प्रसन्न-वक्त्र-पण्कजे निकुञ्ज-भू-विलासिनि व्रजेन्द्र–भानु–नन्दिनि व्रजेन्द्र–सूनु–संगते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥१॥ समस्त मुनिगण आपके चरणों की वंदना करते हैं, आप तीनों लोकों का शोक दूर करने वाली हैं, आप प्रसन्नचित्त प्रफुल्लित मुख कमल वाली हैं, आप धरा पर निकुंज में विलास करने वाली हैं। आप राजा वृषभानु की राजकुमारी हैं, आप ब्रजराज नन्द किशोर श्री कृष्ण की चिरसंगिनी है, हे जग जननी श्रीराधे माँ ! आप मुझे अपनी कृपा दृष्टि से कृतार्थ कब करोगी ?
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श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् lyrics in Sanskrit

  नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् ।देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥ ॐ अथ सकलसौभाग्यदायक श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् । शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नो-पशान्तये ॥ १॥ यस्य द्विरदवक्त्राद्याः पारिषद्याः परः शतम् ।विघ्नं निघ्नन्ति सततं विष्वक्सेनं तमाश्रये ॥ २॥ व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम् ।पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम् ॥ ३॥ व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे ।नमो वै ब्रह्मनिधये
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धीर समीरे यमुना तीरे… जयदेव…गीतगोविन्द

धीरसमीरे यमुनातीरे वसति वने वनमालीlगोपीपीनपयोधरमर्दनचञ्चलकरयुगशाली ॥ १॥ नाम समेतं कृतसंकेतं वादयते मृदुवेणुम्।बहु मनुते ननु ते तनुसंगतपवनचलितमपि रेणुम् ॥ २॥ धीरसमीरे यमुनातीरे वसति वने वनमालीl पतति पतत्रे विचलति पत्रे शङ्कितभवदुपयानम्।रचयति शयनं सचकितनयनं पश्यति तव पन्थानम् ॥३॥ धीरसमीरे यमुनातीरे वसति वने वनमालीl मुखरमधीरं त्यज मञ्जीरं रिपुमिव केलिसुलोलम्।चल सखि कुञ्जं सतिमिरपुञ्जं शीलय नीलनिचोलम् ॥ ४॥ धीरसमीरे यमुनातीरे वसति
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Hanuman Chalisa decoded with Lyrics and Meaning

॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ shrī guru charaṇ saroj raj, nij manu mukuru sudhāri baraṇau raghubar bimal jasu, jo dāyaku phal chāri बुद्धिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश बिकार॥ buddhihīn tanu jānike, sumiraũ pavan kumār bal buddhi vidyā dehu mohĩ, harahu kalesh bikār जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ।1। jay hanumān jñān guṇ sāgar jay kapīs tihũ lok ujāgar राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ।2। rām dūt atulit bal dhāmā añjani putra pavanasut nāmā महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी ।3। mahābīr bikram bajaraṅgi kumati nivār sumati ke saṅgī कंचन बरन बिराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा ।4। kañchan baran birāj subesā kānan kuṇḍal kuñchit kesa हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै ।5। hāth bajra au dhvajā birājai kāṅdhe mūnj jane-ū sājai संकर सुवन केसरीनन्दन। तेज प्रताप महा जग बंदन ।6। saṅkar suvan kesarīnandan tej pratāp mahā jag bandan बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर ।7। bidyāvān gunī ati chātur rām kāj karibe ko ātur प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया ।8। prabhu charitra sunibe ko rasiyā rām lakhan sītā man basiyā सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रुप धरि लंक जरावा ।9। sūkshm rūp dhari siyahĩ dikhāvā bikaṭ rūp dhari laṇka jarāvā भीम रुप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे ।10। bhīm rūp dhari asur saṅhāre rāmachandra ke kāj saṅvāre लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ।11। lāy sajīvan lakhan jiyāye shrī raghubīr harashi ur lāye रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।12। raghupati kīnhī bahut baṛā-ī tum mam priya bharatahi sam bhā-ī सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ।13। sahas badan tumharo jas gāvaĩ as kahi shrīpati kaṇṭh lagāvaĩ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा ।14। sanakādik brahmādi munīsā nārad sārad sahit ahīsā जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।15। jam kuber digapāl jahāṅ te kabi kobid kahi sake kahāṅ te तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा ।16। tum upakār sugrīvahĩ kīnhā rām milāya rājapad dīnhā तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भये सब जग जाना ।17। tumharo mantra bibhīshan mānā laṇkesvar bha-e sab jag jānā जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ।18। jug sahasr jojan par bhānū līlyo tāhi madhur phal jānū प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं ।19। prabhu mudrikā meli mukh māhīṅ jaladhi lāṇghi gaye acharaj nāhīṅ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।20। durgam kāj jagat ke jete sugam anugrah tumhare tete राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।21। rām duāre tum rakhavāre hot na ājñā binu paisāre सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डरना ।22। sab sukh lahai tumhārī saranā tum rachhak kāhū ko dara nā आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै ।23। āpan tej samhārau āpai tīnõ loka hāṅk tẽ kāṅpai भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै ।24। bhūt pisāch nikaṭ nahĩ āvai mahābīr jab nām sunāvai नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा ।25। nāsai rog hare sab pīrā japat nirantar hanumat bīrā संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ।26। saṇkaṭ te hanumān chhuṛāvai man kram bachan dhyān jo lāvai सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा ।27। sab par rām tapasvī rājā tin ke kāj sakal tum sājā और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फ़ल पावै ।28। aur manorath jo koī lāvai soī amit jīvan phal pāvai चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा ।29। chārõn jug paratāp tumhārā hai parasiddh jagat ujiyārā साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकन्दन राम दुलारे ।30। sādhu sant ke tum rakhavāre asur nikandan rām dulāre अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता ।31। ashṭ siddhi nau nidhi ke dātā as bar dīn jānakī mātā राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा ।32। rām rasāyan tūmhare pāsā sadā raho raghupati ke dāsā तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै ।33। tumhare bhajan rām ko pāvai janam janam ke duḥkh bisarāvai अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ।34। antkāl raghubar pur jā-ī jahāṅ janm hari-bhakt kahā-ī और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्ब सुख करई ।35। aur devatā chitt na dhara-ī hanumat sei sarb sukh kara-ī संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।36। sankaṭ kaṭai miṭai sab pīrā jo sumirai hanumat bal bīrā जै जै जै हनुमान गोसाई। कृपा करहु गुरु देव की नाई ।37। jai jai jai hanumān gosā-ī kṛpā karahu guru dev kī nā-ī जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई ।38। jo sat bār pāṭh kar koī chhūṭahi bandi mahā sukh hoī जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा ।39। jo yah paṛe hanumān chālīsā hoy siddhi sākhī gaurīsā तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा ।40। tulasīdās sadā hari cherā kījai nāth hṛday mahã ḍerā ॥ दोहा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप। राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप॥ pavan tanay saṅkaṭ haran, maṅgal mūrati rūp rām lakhan sītā sahit hṛday basahu sur bhūp ॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
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Sri Hari Stotram – with meaning in English

जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालंनभोनीलकायं दुरावारमायं सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं॥1॥ I bow again and again in devotion to Him (Lord Vishnu)—Who is the Protector of the cosmic web (जगज्जालपालं) (The one who sustains and safeguards the entire universe, maintaining order and harmony within the creation),Who is adorned with the moving garland upon His neck (चलत्कण्ठमालं) (Often refers
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Govind Damodar Strotram – गोविन्द दामोदर स्तोत्रम

श्री बिल्वमंगल ठाकुर द्वारा रचित यह स्तोत्र भगवान श्रीकृष्ण के बालस्वरूप की मनोहारी छवि का वर्णन करता है। इसे भक्तों के हृदय में ईश्वर के सगुण रूप के ध्यान को सरल, सजीव और साकार बनाने के उद्देश्य से रचा गया है। इसमें उस अनुपम दृश्य का चित्रण है जब भगवान श्रीकृष्ण बालरूप में वटपत्र पर
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