Kab hun mile piya mora by – meerabai (गोबिंद कबहुं मिलै पिया मेरा, मीरा बाई)

गोबिंद कबहुं मिलै पिया मेरा। चरण कमल को हंसि हंसि देखूँ, राखूं नैना नेरा।1। निरखन को मोहे चाव घनेरो, कब देखूँ मुख तेरा।2।
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